स.सि. २/३३/१८६. यन्नखत्वक्सदृशमुपात्तकाठिन्यंशुक्रशोणित-
परिवरण परिमण्डलं तदण्डम् । - जो नख की त्वचा केे समान कठिन है, गोल है, और जिसका आवरण शुक्र और शोणितसे बना है उसेअण्ड कहते हैं। (रा. वा. २/३३/२/१४३/३२) (गो. जी./जी.प्र. ८४/२०७)
१. (ध.५/प्र.२७) Number | २. सौधर्म स्वर्ग का १७वा पटल इन्द्रक-दे,स्वर्ग ५/३ । ३. रुचक पर्वतस्थ एक कूट - दे.लोक ५/१३। ४. मानुषोत्तर व कुण्डल पर्वतस्थ कूट - दे. लोक ५/१०,१२ ।
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